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मनीष कश्यप का बड़ा ऐलान,संजय जायसवाल परेशान !

2025 की असफलता ने मुझे दोगुना शक्तिशाली बना दिया। मैं 2029 के लोकसभा चुनाव में उतरूंगा, जिससे बिहार की पुकार को देशव्यापी मंच मिले।" कश्यप ने जोर दिया कि यह उनका निजी निर्णय है, जन सुराज पार्टी का कोई औपचारिक मत नहीं। उन्होंने उल्लेख किया कि दल शिक्षा विस्तार, नौकरी अवसर, चिकित्सा उन्नयन व भ्रष्टाचार नाश जैसे क्षेत्रों में प्रयास जारी रखेगा, किंतु मतदान रणनीति में उनका अलग सहयोग होगा। किशोर की 'बिहार रूपांतरण यात्रा' को नींव बताते हुए

प्रशांत कुमार प्रणय की रिपोर्ट

पटना, 23 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली कठोर पराजय के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भितरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का मौन उपवास रखा, जो राजनीतिक मंडियों में बहस का विषय बन गया। इस उपवास में जन सुराज पार्टी के चनपटिया के पूर्व प्रत्याशी मनीष कश्यप भी शरीक हुए, जहां उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसा व सत्य के मूल्यों को स्मरण कराते हुए राज्य के उत्थान का प्रण लिया। किशोर ने अपनी लंबी पैदल यात्रा के बावजूद न मिली सफलता पर गहरा आत्मावलोकन किया। आश्रम के प्राचीन परिवेश में सैकड़ों अनुयायी जुटे, मगर आयोजन पूरी तरह नीरव व संयमित रहा – न कोई घोषणाएं, न कोई उद्घोष, केवल चिंतन की गहनता में बिहार के स्वर्णिम कल की रूपरेखा।

उपवास के बाद ही, रविवार को पटना के शेखपुरा हाउस में जन सुराज की निर्णायक बैठक संपन्न हुई। इससे ठीक पहले, पार्टी ने अपनी संपूर्ण समितियों को समाप्त करने का कदम उठाया था, जो ढांचागत नवीनीकरण की ओर इशारा करता है। बैठक में प्रशांत किशोर व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे, जहां उन्होंने सदस्यों संग चुनावी नतीजों का विश्लेषण किया। प्रदेश प्रमुख मनोज भारती की मदद से आगे बढ़ी इस परिषद में पराजय के मूल में सत्तारूढ़ मोर्चे की कथित साजिशें, धन का अपव्यय व बाहरी प्रभाव पर खुली बहस हुई। फिर भी, प्राथमिक जोर आने वाली योजनाओं पर था – संगठन को सुदृढ़ करना व जनसंपर्क विस्तार। जन सुराज पार्टी के चनपटिया के पूर्व प्रत्याशी मनीष कश्यप बैठक में प्रमुखता से भाग लिए, जहां उन्होंने युवा दस्ते को ताजा उत्साह प्रदान किया।

बैठक के समापन पर जन सुराज पार्टी के चनपटिया के पूर्व प्रत्याशी मनीष कश्यप ने संवाददाताओं से बातचीत में आश्चर्यजनक उद्घाटन किया। उन्होंने निष्कपट भाव से कहा, “2025 की असफलता ने मुझे दोगुना शक्तिशाली बना दिया। मैं 2029 के लोकसभा चुनाव में उतरूंगा, जिससे बिहार की पुकार को देशव्यापी मंच मिले।” कश्यप ने जोर दिया कि यह उनका निजी निर्णय है, जन सुराज पार्टी का कोई औपचारिक मत नहीं। उन्होंने उल्लेख किया कि दल शिक्षा विस्तार, नौकरी अवसर, चिकित्सा उन्नयन व भ्रष्टाचार नाश जैसे क्षेत्रों में प्रयास जारी रखेगा, किंतु मतदान रणनीति में उनका अलग सहयोग होगा। किशोर की ‘बिहार रूपांतरण यात्रा’ को नींव बताते हुए कश्यप ने उपवास को ताजा प्रस्थान का चिह्न माना। “भूलों से सबक लिया, अब प्रगति की ओर। 2029 में मैं क्षेत्र में प्रवेश करूंगा,” उन्होंने पुनरावृत्ति की।

यह घोषणा राजनीतिक क्षेत्रों में हड़कंप पैदा कर दी। एनडीए प्रतिनिधियों ने इसे ‘निजी लालसा’ करार दिया, जबकि बाकी गुटों ने कश्यप की साहसिकता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। जन सुराज के पुनर्संरचना से दल में सकारात्मक वातावरण व्याप्त है। किशोर ने बैठक उपरांत सोशल प्लेटफॉर्म पर संदेश देकर समर्थकों से सामंजस्य की पुकार लगाई। जानकारों का अनुमान है कि कश्यप यदि 2029 में सक्रिय हुए, तो बिहार से देशी राजनीति में अनोखा परिवर्तन संभव है। उपवास, सभा व यह उद्घाटन जन सुराज को विफलता से उबारने का स्वर्णिम मौका सौंप रहे हैं। बिहार की राजनीति अब नित नए ट्विस्ट के साथ आगे बढ़ेगी।

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